Post Views: 163 Post navigation अंबुजा अडानी सीमेंट रवान के श्रमिको व इंटक यूनियन की हुई जीत :तीन माह में मांगे होगे पुरे बलौदाबाजार : बलौदाबाजार जिले के अन्तर्गत संचालित अंबुजा अडानी सीमेंट मे पीछले कुछ दिनो पहले से ही यहां के श्रमिको के द्वारा इंटक यूनियन के बैनर तले। यहां श्रमिक विरोधी प्रबंधन द्वारा तानाशाही शासन करवाया जा रहा था। जिसके विरोध मे यहां के श्रमिको के द्वारा अनिश्चितकालीन हड़ताल व धरने की घोषणा लिखित में दिया जा चूका था। इसी बीच मामले को सूलझाने के लिये रायपुर के ए. एल. सी. केंद्रीय अशिस्टेंट लेबर कमिश्नर रायपुर के समक्ष समझौते के लिए पेश किया गया था। जिसकी सुनवाई आज 24 अगस्त को त्रिपक्षीय समझौता हुवा। जिसके तहत ALC द्वारा त्रिपक्षीय वार्ता में यह समझौता कराया गया है। कि यहां के श्रमिकों के जायज मांगों को तीन माह के अंदर पूरा किया जाएगा। जिसके लिये प्रबंधन द्वारा लिखित में आश्वासन दिया है। ज्ञात हो कि इस केन्द्रीय श्रम आयुक्त शासन (ALC) रायपुर एवं अंबुजा अडानी HR रवान के डिप्टी मैनेजर भुपेंद्र ठाकुर एवं राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस इंटक युनियन पदाधिकारीयो जिसमे, अध्यक्ष श्री चिंतामणी डोंगरे उपाध्यक्ष चेतेन्द वर्मा, महासचिव राधेश्याम भतपहरे, सचिव मोहन साहू, गौकरण साहू, संगठन मंत्री दौलत धुव एवं ठेकेदारो के समक्ष तृपक्षीय वार्ता संपन्न हुआ। जिसमें यह समझौता किया गया। कि जीन मजदूरो को काम से निकाला गया था। उसे काम पर वापस लिया जाएगा। वही पैकिंग प्लांट के मजदूरो को कालिंग ड्यूटी को बंद कर, उनको सिप्ट ड्यूटी दिया जाएगा। इसके अलावा इंटक यूनियन का मैनेजमेंट के साथ प्रत्येक माह मिटिंग लिया जाएगा। जिसमें बातचीत कर इंटक यूनियन एवं मैनेजमेंट के द्वारा समस्याओं का समाधान किया जायेगा। गौरतलब है कि इंटक यूनियन के जायज मांगों को तीन महीने के अंदर मैनेजमेंट के द्वारा पूरा किया जायेगा। जिसे केन्द्रीय उपश्रम आयुक्त रायपुर के समक्ष मैनेजमेंट अंबुजा अडानी सीमेंट रवान द्वारा लिखित में दिया गया है। ये कोनो आम चिनहा(संगठन) नो हरे ये कोइला ल हीरा बनाथे अऊ दबे आवाज ला दहाडे़ बर सिखाथे। महाज 8 साल म येकर चाहने वाला के संख्या लाख म पहुँच गे हे। ये मा अतका ताकत हे कि बड़े बड़े राजनीति दल मन येला दबाय के बरसक परयास करथे येकर सेनानी मन ल जेल पहुँचाय के काम करथे मगर ये मन ला पता नई होही मनखे ल जेल म धांध सकत हस फेर ओकर विचार ला कभू नई धाँध सकस। ये संगठन लोगन ल बोले के ताकत देथे लड़े के ताकत देथे मगर मोला एक बात के बहुत दुःख लगथे कुछ अइसे अइसे भी आदमी देखे ल मिलथे कि जब ये संगठन ओला कोईला ले हीरा बनाथे तहां वो हीरा ये कारिगर के ही बुराई करे बर धर लेथे। लोगन मन पूछथे मोला कि तोला का मिलथे येकर संग जुड़े हस त कुछु पईसा कउड़ी मिलथे का कि काहीं पद म हस। त मैं शान के साथ बोलथव ना मैं पद म हव अउ ना ही मोला पईसा मिलय बस मिलथे त मोर स्वाभिमान, मोर हक अधिकार, मोर कला संस्कृति के रक्षा, हमर मजदूर भाई मनके हक बर लड़ाई, हमर पुरखा मन के सम्मान देना अउ छत्तीसगढ़ महतारी के अस्मिता के रक्षा करे बर हिम्मत मिलथे। सबो भाई ले निवेदन हे कि कहूं आप पद पईसा बर जुड़त होहू त सादर इही मेर ल बिदा अउ कहूं अपन स्वाभिमान बर जुड़त होहु त जोहार