Post Views: 90 Post navigation ? भारत के राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के सम्बोधन शांति सरोवर रायपुर छत्तीसगढ़ से ? छात्रों को संदेश धैर्य और कड़ी मेहनत के साथ अपनी रुचि के क्षेत्र में करें प्रयास, कभी निराश न हों! ?सभी को जय जोहार ! पूरी मानवता के कल्याण के लिए ब्रह्मकुमारी परिवार बहुत अच्छा कार्य कर रहा है। मैं इसके लिए बहुत-बहुत बधाई देती हूँ। सकारात्मक परिवर्तन को लेकर ओडिशा में यह कार्यक्रम शुरू हुआ है! और मैं आज यहाँ आप सभी के बीच में भी हूँ। ? मैं यहाँ पहले ही आ चुकी हूँ। फिर से बुलाने के लिए आप सभी को धन्यवाद। छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया ! ? एक ओर हमारा देश नित-नई ऊंचाइयों को छू रहा है, चांद पर तिरंगा लहरा रहा है या विश्वस्तर खेल में कीर्तिमान रच रहा है। हमारे देशवासी अनेक नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। ? दूसरी ओर एक अत्यंत गम्भीर विषय है कुछ दिन पहले नीट की तैयारी कर रहे दो विद्यार्थियों ने अपने जीवन, अपने सपनों अपने भविष्य का अंत कर दिया। ऐसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए बल्कि हमें प्रतिस्पर्धा को सकारात्मक रूप से लेना चाहिए हार-जीत तो होती रहती है। ? बच्चों का कांपिटिशन का प्रेशर है! जितना जरूरी उनका करियर है। उतना ही जरूरी है कि वे जीवन की चुनौतियों का सामना कर सकें। ? मुझे लगता है कि इस पाजिटिव थीम की सहायता से हम उन बच्चों की मदद कर सकते हैं जो बच्चे आधी-अधूरी जिंदगी जी कर चले जाते हैं। ? हर बच्चे में अपनी विशिष्ट प्रतिभा है। अपनी रुचि को जानकर इस दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। ? यह युग साइंटिफिक युग है। अभी के बच्चे बहुत शार्प माइंड के होते हैं। थोड़ा धैर्य कम होता है। हमारे ब्रह्मकुमारी परिवार के सदस्य कई बरसों से इस दिशा में काम कर रहे हैं। ? मेरी आध्यात्मिक यात्रा में भी ब्रह्मकुमारी संस्था ने मेरा बहुत साथ दिया है। जब मेरे जीवन में कठिनाई थी तब मैं उनके पास जाती थी। ? उनका रास्ता कठिन है पर कष्ट सहने से ही कृष्ण मिलते हैं इसलिए धैर्य का जीवन जीना चाहिए। ? कष्ट सहकर ही हम सफलता हासिल कर सकते हैं। ब्रह्मकुमारी का रास्ता मुझे बहुत अच्छा लगा। आप सहजता से काम करते हुए आप अपनी जिंदगी को बेहतर तरीके से जी सकते हैं। जिंदगी जीने की कला वो सिखाते हैं। ? आत्मविश्वास ही ऐसी पूंजी है जिससे हम अपना रास्ता ढूँढ सकते हैं। हम सभी टेक्नालाजी के युग में जी रहे हैं। ? बच्चे आर्टिफिशियल इंजीनियरिंग की बात कर रहे हैं लेकिन यह भी जरूरी है कि दिन का कुछ समय मोबाइल से दूर रहकर भी बिताएं। ? साइंस और टेक्नालाजी के साथ आध्यात्मिकता को भी जोड़े तो जीवन आसान हो जाएगा। ? जिंदगी को कैसे सफलता से जीये, किस तरह सुख से जीवन जिये, इसका रास्ता बहुत सरल है। ? हम केवल एक शरीर नहीं हैं। हम एक आत्मा हैं। परम पिता परमात्मा का अभिन्न अंग है। धैर्य सुख का रास्ता है। यह कठिन है लेकिन अभ्यास से यह रास्ता भी सहज हो जाता है। ? मैं सभी से कहना चाहती हूं कि अपनी रुचि के साथ सकारात्मक कार्य करते रहिये। ऐसे लोगों के साथ रहिये जो आपको सही रास्ता दिखा सके। ? ब्रह्मकुमारी में सब लोग भारत में ही नहीं दुनिया भर में शांति के लिए कार्य कर रहे हैं। सब शांति के विस्तार के लिए प्रयास कर रहे हैं। ? प्रबल शक्ति से किये गये कार्य से सफलता मिलती है। ये दुनिया को बेहतर बनाने में अपना अमूल्य योगदान दे रहे हैं। ? छत्तीसगढ़ में आपने जो काम आरंभ किया है मैं उसके लिए आपको बधाई देती हूँ। ? स्वर्णिम युग का स्वप्न जो हम देख रहे हैं रामराज्य के लिए हमें राम बनना होगा, सीता बनना होगा। ?शारीरिक और मानसिक तत्व के लिए ये बहुत जरूरी है। यह केवल ब्रम्हकुमारी में सिखाया जाता है। ?????????? रिपोर्टर रोहित वर्मा लोकेशन खरोरा *संतान की दीर्घायु की कामना को लेकर हलष्ठी का व्रत मनाया गया* खरोरा:- संतान की दीर्घायु एवं सुख समृद्धि की कामना को लेकर मंगलवार को हलषष्ठी का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। माताओं ने घर के आंगन में सगरी बनाकर भगवान शिव की विशेष पूजा -अर्चना की तथा पसहर चावल का सेवन का व्रत को पूर्ण किया । यह पर्व भादो शुक्ल पक्ष को प्रतिवर्ष मनाया जाने वाला हलषष्ठी पर्व खरोरा सहित आसपास ग्रामीण अंचलों में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया । पूजा पाठ की तैयारी को लेकर आज सुबह से ही जुटी रही तथा बच्चों की सुख समृद्धि एवं दीर्घायु की कामना को लेकर माताओं ने व्रत रखा है । हलषष्ठी के दिन को प्रमुख रूप से भगवान कार्तिकेय का जन्मदिन मनाया जाता है। इस अवसर पर संतान धारी महिलाएं काफी संख्या में व्रत रखते हैं। घर में पूजा पाठ का दौर चलता रहा *पोता मारकर कर दी आशीष* पूजा अर्चना के बाद माताओं ने अपने बच्चों के पीठ पर सात रंग के कपड़ों के टुकडो से निशान लगाकर लंबी उम्र का आशीर्वाद दिया। पूजन सामग्री में समर्पित करने के बाद व्रतधारी माताओं ने पसहर चावल खाकर उपवास तोड़ा तथा भैंस का दूध और दही उपयोग किया । वही नगर के साथ-साथ आज ग्रामीण क्षेत्र में हलषष्ठी का पर्व मनाया गया। पूजा के दौरान महिलाएं पसहर चावल को पकाकर भोग लगाती है साथ ही चावल का सेवन का व्रत तोड़ती है। अन्य पूजन सामग्री का भी महत्व : फूल ,नारियल ,फुलोरी , महुआ , दोना , टोकनी ,लाई छह प्रकार की भाजी का भी पूजा में महत्व है । माता देवकी ने किया था। व्रत मान्यता है की माता देवकी के छह पुत्रों को जब कंस ने मार दिया तब पुत्र की रक्षा की कामना के लिए माता देवकी ने भादो कृष्ण पक्ष को षष्ठी तिथि को षष्ठीदेवी आराधना करते हुए व्रत रखा था । इसी मान्यता के चलते महिलाएं अपने पुत्र की खुशहाली के लिए छठ का व्रत रखती है