नागा शब्द संस्कृत के ‘नग’ से बना है। नग मतलब पहाड़। यानी पहाड़ों या गुफाओं में रहने वाले नागा कहलाते हैं। 9वीं सदी में आदि शंकराचार्य ने दशनामी संप्रदाय की शुरुआत की। ज्यादातर नागा संन्यासी इसी संप्रदाय से आते हैं। इन संन्यासियों को दीक्षा देते वक्त दस नामों से जोड़ा जाता है। ये दस नाम हैं- गिरी, पुरी, भारती, वन, अरण्य, पर्वत, सागर, तीर्थ, आश्रम और सरस्वती। इसलिए नागा साधुओं को दशनामी भी कहा जाता है। नागा संन्यासी दो तरह के होते हैं- एक शास्त्रधारी और दूसरा शस्त्रधारी। दरअसल, मुगलों के आक्रमण के बाद सैनिक शाखा शुरू करने की योजना बनी। शुरुआत में कुछ नागा साधुओं ने इसका यह कहते हुए विरोध किया कि वे आध्यात्मिक हैं, उन्हें शस्त्र की जरूरत नहीं। बाद में शृंगेरी मठ ने शस्त्र-अस्त्र वाले नागा साधुओं की फौज आमतौर पर नागा बनने की उम्र 17 से 19 साल होती है। इसके तीन स्टेज हैं- महापुरुष, अवधूत और दिगंबर, लेकिन इससे पहले एक प्रीस्टेज यानी परख अवधि होती है। जो भी नागा साधु बनने के लिए अखाड़े में आवेदन देता है, उसे पहले लौटा दिया जाता है। फिर भी वो नहीं मानता, तब अखाड़ा उसकी पूरी पड़ताल करता है। Post Views: 109 Post navigation मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सशस्त्र सेना वयोवृद्ध दिवस पर शहीद सैनिकों के परिवारों का किया सम्मान….. सोनिया ने नए कांग्रेस भवन का किया उद्घाटन…